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UmrahAi
उमराह गाइड

इहराम और नीयत

इस हिस्से में इहराम बाँधने से लेकर काबा शरीफ़ पर पहली नज़र तक के क़दम और हर क़दम की दुआएँ हैं।

इहराम की पाबंदियाँ

सफ़र के साथी, अब आप इहराम की हालत में हैं। इस पल से इहराम की पाबंदियों का ख़याल रखना ज़रूरी है। ये हदें सिर्फ़ उन कामों की सूची नहीं हैं जो आपको नहीं करने; ये इबादत की एक ख़ास हालत का हिस्सा हैं, जिसमें आपको अपने सब्र, ज़बान, बदन और बर्ताव का और ज़्यादा ख़याल रखना है।

इस क़दम में दी गई पाबंदियों को बिना जल्दबाज़ी के पढ़ें। ख़ास तौर पर उन बातों को याद रखें जिनसे सफ़र के दौरान आपका वास्ता पड़ेगा। भीड़ में सब्र बनाए रखें, आसपास के लोगों को तकलीफ़ न दें और अपने बर्ताव में भी इहराम का अदब दिखाएँ।

A- इहराम की हालत में अपने बदन से जुड़े मना किए गए काम:

  • ख़ुशबू लगाना।
  • ख़ुशबू वाला साबुन इस्तेमाल करना।
  • हजामत करना, मूँछें काटना।
  • सजने-सँवरने के मक़सद से मेहँदी लगाना, लिपस्टिक और नेल पॉलिश जैसी चीज़ें इस्तेमाल करना।
  • नाख़ून काटना।
  • बदन के किसी भी हिस्से से बाल उखाड़ना या काटना।
  • नाभि के नीचे गुप्तांगों के आसपास और बग़लों के बाल उखाड़ना या मूँड़ना।

B- पहनावे से जुड़े मना किए गए काम (मर्दों के लिए):

  • सिर पर टोपी पहनना या पगड़ी बाँधना।
  • पतलून, कोट और क़मीज़ जैसे सिले हुए कपड़े पहनना।
  • मोज़े, दस्ताने या ऐसे जूते और चप्पल पहनना जिनका ऊपर का हिस्सा और एड़ी वाला हिस्सा बंद हो।

C- यौन संबंध से जुड़े मना किए गए काम:

  • हमबिस्तरी करना।
  • चूमना।
  • ऐसी बातें, काम और बर्ताव करना जो हमबिस्तरी का कारण बन सकते हों।

D- दूसरों को नुक़सान पहुँचाने वाले मना किए गए काम:

  • लड़ाई करना।
  • बहस और झगड़ा करना।
  • गाली देना, बेइज़्ज़ती करना और दिल दुखाना।

E- हरम के इलाक़े से जुड़े मना किए गए काम:

  • अपने आप उगने वाली हरी घास तोड़ना और पेड़ों को काटना, छाँटना या कुचलना।
  • नुक़सान न पहुँचाने वाले जानवरों को मारना।

F- ज़मीन पर रहने वाले जानवरों के शिकार से जुड़े मना किए गए काम:

  • ज़मीन पर रहने वाले किसी भी तरह के जानवर का शिकार करना, चाहे उसका गोश्त खाया जाता हो या नहीं।
  • शिकारी की मदद करना, भले ही इशारे से हो।
  • शिकार के जानवरों को नुक़सान पहुँचाना।

किसी बात को लेकर उलझन हो तो ख़ुद से हुक्म तय न करें; जो हुआ है उसे लिख लें और UmrahAi Assistant से पूछें।

वुज़ू और इहराम

सफ़र के साथी, अब आप इहराम की हालत में दाख़िल होने की तैयारी कर रहे हैं। इहराम में दाख़िल होना उमराह का फ़र्ज़ है। इहराम का मतलब है उमराह की नीयत और तलबिया के साथ इबादत की उस ख़ास हालत में दाख़िल होना जिसमें इहराम की पाबंदियाँ शुरू हो जाती हैं।

इस पल को सिर्फ़ कपड़े बदलना न समझें। कुछ ही देर में आप नीयत और तलबिया के साथ अल्लाह तआला की रज़ा के लिए रोज़मर्रा की ज़िंदगी में जायज़ कुछ चीज़ों से दूर रहने का इरादा करेंगे।

इहराम की नीयत करने वाले मर्द इज़ार और रिदा लपेटते हैं। इन दो चादरों को आम बोलचाल में इहराम कहा जाता है। औरतें अपने रोज़ के सामान्य कपड़ों में नीयत करती हैं। इहराम, हज और उमराह की इबादतें अदा करने के लिए कुछ मुबाह यानी जायज़ चीज़ों को अपने लिए हराम कर लेना है। इहराम में दाख़िल होने का रूहानी मर्म और हिकमत यह है कि दुनिया की ज़ीनत बने कपड़ों को उतारकर पैदाइश, मुर्दों के दोबारा ज़िंदा किए जाने, मैदान-ए-महशर, हिसाब के दिन और मीज़ान पर ग़ौर किया जाए और पाकीज़ा हालत में अल्लाह की रूहानी बरकतें हासिल की जाएँ।

दिल को एकाग्र करें, तैयारी पूरी करें और इस मुबारक हालत में समझ-बूझ के साथ क़दम रखें।

इहराम की नमाज़

अगर अभी नमाज़ का मकरूह वक़्त नहीं है तो इहराम की दो रकअत नमाज़ पढ़ें। यह नमाज़ सुन्नत है और इहराम में दाख़िल होने से पहले सफ़र की भागदौड़ से हटकर दिल को एकाग्र करने का एक अच्छा मौक़ा है।

इहराम की नमाज़ पढ़ने की नीयत करें।
“मैंने अल्लाह तआला की रज़ा के लिए इहराम की नमाज़ पढ़ने की नीयत की।”

पहली रकअत में सूरह अल-काफ़िरून और दूसरी रकअत में सूरह अल-इख़लास पढ़ने की सलाह दी गई है। जिन्हें ये सूरतें याद नहीं, वे नमाज़ में अपनी पसंद की कोई दूसरी सूरह पढ़ सकते हैं।

नमाज़ को जल्दबाज़ी में पूरा करने वाला काम न समझें। अपने रब की ओर रुजू करें, नीयत ताज़ा करें और कुछ ही देर में शुरू होने वाली उमराह की इबादत के लिए दिल को तैयार करें।

उमराह की नीयत

सफ़र के साथी, अब उमराह की नीयत का वक़्त है। एक पल रुकें, दिल को एकाग्र करें और याद करें कि आप यहाँ क्यों आए हैं।

अपना उमराह सिर्फ़ अल्लाह तआला की रज़ा के लिए करने की नीयत करें। उसी से सफ़र की आसानी और अपनी इबादत की क़बूलियत माँगें।

नीयत को जल्दबाज़ी में कहे गए कुछ अल्फ़ाज़ न समझें, बल्कि इस मुबारक सफ़र की शुरुआत में दिल से किया गया अहद मानें। नीयत के बाद आप तलबिया पढ़ेंगे।

दुआ

اللَّهُمَّ إِنِّي أُرِيدُ الْعُمْرَةَ فَيَسِّرْهَا لِي وَتَقَبَّلْهَا مِنِّي

उच्चारण

अल्लाहुम्मा इन्नी उरीदुल उमरता फ़यस्सिरहा ली व तक़ब्बलहा मिन्नी।

अर्थ

ऐ अल्लाह! मैं तेरी रज़ा के लिए उमराह करना चाहता/चाहती हूँ। इसे मेरे लिए आसान फ़रमा और मेरी ओर से क़बूल फ़रमा।

तलबिया

नीयत के तुरंत बाद तलबिया तीन बार पढ़ें। तलबिया नीयत का फ़र्ज़ है, इसलिए इसे ज़रूर पढ़ना चाहिए।

तलबिया को सिर्फ़ ज़बान से दोहराए जाने वाले अल्फ़ाज़ न समझें। हर बार पढ़ते हुए इस एहसास के साथ अल्लाह तआला की ओर रुजू करें कि “मेरे रब, मैं तेरे हुक्म पर हाज़िर हूँ” और अपनी शुरू की हुई इबादत की संजीदगी याद रखें।

रास्ते भर मस्जिदुल हराम के संगमरमर वाले हिस्से तक पहुँचने तक तकबीर, तहलील, दुरूद शरीफ़ और तलबिया पढ़ते रहें। मस्जिदुल हराम के संगमरमर वाले हिस्से में पहुँच जाएँ तो तलबिया पढ़ना बंद कर दें।

सफ़र के साथी, अब आप इहराम की हालत में हैं। आगे के क़दमों में अपनी ज़बान और बर्ताव दोनों को इस मुबारक हालत के अदब के मुताबिक़ रखें।

दुआ

لَبَّيْكَ اللَّهُمَّ لَبَّيْكَ، لَبَّيْكَ لَا شَرِيكَ لَكَ لَبَّيْكَ، إِنَّ الْحَمْدَ وَالنِّعْمَةَ لَكَ وَالْمُلْكَ، لَا شَرِيكَ لَكَ

उच्चारण

लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक, लब्बैका ला शरीका लका लब्बैक, इन्नल हम्दा वन्निअमता लका वल मुल्क, ला शरीका लक।

अर्थ

हाज़िर हूँ, ऐ अल्लाह, हाज़िर हूँ! मैं तेरे हुक्म पर हाज़िर हूँ, तेरा कोई शरीक नहीं, मैं तेरे हुक्म पर हाज़िर हूँ। बेशक हम्द सिर्फ़ तेरे लिए है, नेमत तेरी है और बादशाहत भी तेरी है। तेरा कोई शरीक नहीं।

मस्जिदुल हराम में दाख़िल होने की दुआ

आप मस्जिदुल हराम पहुँच गए हैं। अंदर दाख़िल होते समय जल्दबाज़ी न करें; लोगों की आवाजाही रोके बिना अदब और सुकून से आगे बढ़ें।

मस्जिद में दाख़िल होने की दुआ पढ़कर अपने रब की ओर रुजू करें। फ़ोन, अपना दल या आसपास की हलचल आपको बेध्यान न करे; कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें और अपने पास मौजूद लोगों से नरमी से पेश आएँ।

अब उस काबा शरीफ़ की ओर बस कुछ क़दम बाक़ी हैं जिसकी तरफ़ आप ज़िंदगी भर नमाज़ में रुख़ करते आए हैं। दिल को एकाग्र करें और इस नेमत का शुक्र याद रखें।

दुआ

بِسْمِ اللَّهِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ وَالصَّلَاةُ وَالسَّلَامُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ذُنُوبِي وَافْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ. نَوَيْتُ الْاِعْتِكَافَ حَتَّى أَخْرُجَ

उच्चारण

बिस्मिल्लाहि वल हम्दु लिल्लाहि वस्सलातु वस्सलामु अला रसूलिल्लाह। अल्लाहुम्मग़फ़िर ली ज़ुनूबी वफ़्तह ली अबवाबा रह्मतिक। नवैतुल इअतिकाफ़ा हत्ता अख़रुज।

अर्थ

मैं अल्लाह के नाम से दाख़िल हो रहा/रही हूँ। हम्द सिर्फ़ अल्लाह के लिए है। अल्लाह के रसूल पर दुरूद व सलाम हो। ऐ अल्लाह! मेरे गुनाह माफ़ फ़रमा, मेरे लिए रहमत के दरवाज़े खोल दे। मैंने मस्जिद से निकलने तक एतिकाफ़ की नीयत की।

काबा शरीफ़ को पहली बार देखकर सलाम और दुआ

सफ़र के साथी, जिस काबा शरीफ़ की ओर शायद आप बरसों से नमाज़ में रुख़ करते आए हैं, वह अब आपके सामने है। इस पल को जल्दबाज़ी में न गुज़ारें। किसी मुनासिब जगह पर दिल को एकाग्र करें जहाँ लोगों की आवाजाही न रुके।

काबा शरीफ़ को सलाम करें, तकबीर कहें और अपने रब से दुआ करें। दिल में जो कुछ है, अल्लाह तआला के सामने अर्ज़ करें; अपने लिए, अपने घरवालों, अपने प्यारों और उम्मत-ए-मुहम्मद के लिए ख़ैर माँगें।

आँसू आएँ तो बहने दें; न आएँ तो अपने आप पर ज़ोर देने की ज़रूरत नहीं। इस पल की क़ीमत किसी एक तरह के एहसास पर निर्भर नहीं है। यह एहसास कि आप काबा शरीफ़ के सामने मौजूद हैं, और अदब व शुक्र के साथ उसकी ओर रुख़ करना, अपने आप में एक बड़ी नेमत है।

दुआ के बाद तवाफ़ की तैयारी करें। इस मुबारक मुलाक़ात की ख़ुशी दिल में सँजोए रखें; मगर आसपास के लोगों को तकलीफ़ दिए बिना सुकून और सावधानी से चलें।

दुआ

اللَّهُ أَكْبَرُ اللَّهُ أَكْبَرُ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَاللَّهُ أَكْبَرُ.
اللَّهُ أَكْبَرُ وَلِلَّهِ الْحَمْدُ. اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ
وَمِنْكَ السَّلَامُ وَإِلَيْكَ يَرْجِعُ السَّلَامُ حَيِّنَا رَبَّنَا
بِالسَّلَامِ وَأَدْخِلْنَا دَارَ السَّلَامِ تَبَارَكْتَ رَبَّنَا
وَتَعَالَيْتَ يَا ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ. اللَّهُمَّ زِدْ هَذَا
الْبَيْتَ تَشْرِيفًا وَتَعْظِيمًا وَتَكْرِيمًا وَمَهَابَةً، وَزِدْ
مَنْ شَرَّفَهُ وَكَرَّمَهُ مِمَّنْ حَجَّهُ أَوِ اعْتَمَرَهُ
تَشْرِيفًا وَتَكْرِيمًا وَتَعْظِيمًا وَبِرًّا.

उच्चारण

अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर। अल्लाहु अकबर व लिल्लाहिल हम्द।

अल्लाहुम्मा अन्तस्सलामु व मिन्कस्सलामु व इलैका यरजिउस्सलाम। हय्यिना रब्बना बिस्सलामि व अदख़िलना दारस्सलाम। तबारकता रब्बना व तआलैता या ज़ल जलालि वल इकराम।

अल्लाहुम्मा ज़िद हाज़ल बैता तशरीफ़न व तअज़ीमन व तकरीमन व महाबतन, व ज़िद मन शर्रफ़हू व कर्रमहू मिम्मन हज्जहू अविअतमरहू तशरीफ़न व तकरीमन व तअज़ीमन व बिर्रा।

अर्थ

अल्लाह हर चीज़ से बड़ा है, अल्लाह हर चीज़ से बड़ा है। अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, अल्लाह हर चीज़ से बड़ा है। अल्लाह हर चीज़ से बड़ा है और हम्द सिर्फ़ उसी के लिए है।

ऐ अल्लाह! तू सलाम है (सलामती देने वाला है), अमन और सलामती सिर्फ़ तुझसे हैं और सलामती फिर तेरी ही ओर लौटती है। ऐ हमारे रब! हमें सलामती के साथ ज़िंदगी दे और हमें सलामती के घर (अपनी जन्नत) में दाख़िल कर। ऐ जलाल और इकराम वाले हमारे रब! तू कितना बुलंद है, तेरी शान कितनी ऊँची है।

ऐ अल्लाह! इस घर (काबा) की इज़्ज़त, अज़मत, शराफ़त और हैबत बढ़ा। हज या उमराह के लिए इसकी ज़ियारत करके इसे इज़्ज़त देने और इसका अदब करने वालों की भी इज़्ज़त, शराफ़त, अज़मत और नेकी बढ़ा।

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UmrahAi ऐप ये क़दम क्रम से दिखाता है और तवाफ़ और सई के दौरान दुआओं के सिलसिले के साथ आपका साथ देता है। यह ऑफ़लाइन भी काम करता है।

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इस पेज के धार्मिक पाठ UmrahAi ऐप के उमराह फ़्लो से लिए गए हैं।

अहले सुन्नत के स्रोतों के अनुसार तैयार किया गया है।