तौबा
सफ़र के साथी, इस मुबारक सफ़र की तैयारी सिर्फ़ सामान बाँध लेने से पूरी नहीं होती। रूहानी पाकीज़गी भी इस तैयारी की शर्त है। अपनी पिछली ग़लतियों पर ग़ौर करें; दिल से पछताएँ, अल्लाह तआला से माफ़ी माँगें और सच्ची तौबा के साथ एक नई शुरुआत की नीयत करें।
अपने लिए कुछ मिनट ख़ामोशी के निकालें। अपने उन गुनाहों को एक-एक करके याद करें जिनका आपको इल्म है; अगर कोई ग़लत काम अब भी जारी है, तो उसे छोड़ने का फ़ैसला करें। दिल का बोझ हल्का करने के लिए इन आसान अल्फ़ाज़ से शुरू कर सकते हैं: “अस्तग़फ़िरुल्लाहा व अतूबु इलैह।”
तौबा सिर्फ़ बीते हुए पर अफ़सोस करना नहीं, बल्कि फिर से अल्लाह तआला की ओर रुजू करना है। दिल में पछतावा, ज़बान पर इस्तिग़फ़ार और एक ज़्यादा पाकीज़ा शुरुआत की नीयत के साथ इस सफ़र पर निकलें।
- दुआ
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ
- उच्चारण
अस्तग़फ़िरुल्लाहा व अतूबु इलैह।
- अर्थ
मैं अल्लाह तआला से माफ़ी माँगता हूँ और उसी की ओर तौबा करता हूँ।


